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गुप्तचर सम्राज्ञी/ Guptachar Samragyi – राकेश अमर गोयल राग

370.00

Pages: 250, 6×9, English
Available Types: Print, E-book
Genre: Fiction

ISBN: 9789349168169
Paperback: Rs.470 + Shipping (ships in 10-15 working days)
Ebook: Rs.149(click here to order, will be delivered within 24 Working Hours)

Description

गुप्तचर सम्राज्ञी/ Guptachar Samragyi – राकेश अमर गोयल राग

गुप्तचर सम्राज्ञी (उपशीर्षक: प्रेमजाल, तांत्रिक रहस्य और राष्ट्रव्यापी साइबर षड्यंत्र) उपन्यास आपको ऐसे रहस्यमय संसार में ले जाता है, जहाँ खुफिया अभियानों, जासूसी के खतरनाक खेल, प्रेमजाल की मोहक उलझनों, तंत्र-मंत्र के गूढ़ रहस्यों और अत्याधुनिक डिजिटल टेक्नोलॉजी का विस्फोटक संगम देखने को मिलता है। इस रोमांचक जासूसी थ्रिलर का कथानक भारत भर में एक भूकंपीय कंपन की तरह बढ़ता है, जिससे देशव्यापी हलचल मच जाती है। कहानी के केंद्र में एक महिला गुप्तचर है—असाधारण बुद्धिमत्ता, मोहक व्यक्तित्व और मायावी रहस्यों से घिरी हुई। वह परछाइयों की आड़ में चलाए जा रहे एक ऐसे नेटवर्क की सम्राज्ञी है, जिसकी पहुँच खुफिया एजेंसियों, राजनीतिक गलियारों और तांत्रिक गतिविधियों के क्षेत्र तक फैली हुई है। जैसे-जैसे जांचकर्ता इस नेटवर्क की परतें खोलते हैं, यह स्पष्ट होता जाता है कि जासूसी इस षड्यंत्र का केवल एक पहलू है। कूटबद्ध संदेशों और परिष्कृत साइबर ऑपरेशनों की परतों के नीचे तांत्रिक अनुष्ठानों और मनोवैज्ञानिक अधीनीकरण की एक रोंगटे खड़े कर देने वाली दुनिया छिपी है।

डिजिटल गुप्तचर खुफिया-तंत्र का अद्यतन रूप है जो कोड, नेटवर्क और डेटा के साथ काम करता है। तंत्र-मंत्र और जासूसी, ऐतिहासिक रूप से एक-दूसरे से जुड़े रहे हैं। जासूसी और तंत्र-मंत्र, दोनों ही गोपनीय ज्ञान पर आधारित हैं: जासूसी के क्षेत्र में, यह गोपनीय जानकारी होती है; और तंत्र-मंत्र के क्षेत्र में, यह गूढ़ रहस्य होते हैं। यह उपन्यास सतत कुतूहल और जोखिम भरी साज़िशों से भरी एक ऐसी कहानी है जो खुफिया-तंत्र, प्रेमपाश, रहस्यमयी तांत्रिक क्रियाओं और आधुनिक डिजिटल टेक्नोलॉजी का एक रोचक समामेलन है।

राकेश अमर गोयल राग का जन्म 22 जनवरी, 1953 को गुड़गांव (गुरुग्राम, दिल्ली एन.सी.आर.), हरियाणा में हुआ। उनके पिता का नाम डॉ. के. सी. अमर और माता का नाम डॉ. (श्रीमती) संतोष अमर है। राग उनका लेखकीय उपनाम है। यह उनके नाम के तीन शब्दों के पहले अक्षरों से बना एक एक्रोनिम है: राकेश (नामकरण संस्कार में दिया गया नाम), अमर (पारिवारिक पहचान से जुड़ा नाम), और गोयल (गोत्रनाम)।

वे विज्ञान में स्नातक और अंग्रेज़ी साहित्य में स्नातकोत्तर हैं। बैंकिंग सेक्टर (भारतीय रिजर्व बैंक सहित) में अधिकारी के रूप में 35 साल की सेवा के उपरांत वे एक वरिष्ठ पद से सेवानिवृत हुए।

उनकी कहानियाँ और लेख हिंदी और अंग्रेजी में प्रतिष्ठित प्रकाशनों में छपे हैं। उनकी रचनाओं में तीन उपन्यास और दो कहानी संग्रह शामिल हैं।

उनके नाम में अमर शब्द की दिलचस्प दास्तान है। काठियावाड़ में थाना देवली रियासत के राजा लंबे अर्से से ऐसे उदर रोग से पीड़ित थे जिसे असाध्य माना जा रहा था। फिर एक साधु की सलाह पर उन्होंने लेखक के डॉक्टर पिता से संपर्क किया। लेखक के पिता के उपचार से राजा का रोग ठीक हो गया। राजा ने अपना आभार उन्हें अमर की उपाधि से सम्मानित करके अभिव्यक्त किया। इसका लेखक के पिता के लिए विशेष महत्व और लगाव था। उन्होंने इसे पारिवारिक पहचान के नाम के रूप में अपनाकर अपने बच्चों के नामों में भी जोड़ दिया।

राग ने पूरे भारत के साथ-साथ दुनिया के कई देशों की यात्रा की है। उनकी रुचियां हैं: साहित्य, इतिहास, धर्म, और समाजशास्त्र।

 

 

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